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Bihar Tender Investigation: 5 करोड़ से अधिक के सरकारी टेंडरों की होगी तकनीकी जांच, 9 विभागों से मांगा रिकॉर्ड

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में जनवरी 2026 से जारी 5 करोड़ रुपये या अधिक के सरकारी टेंडरों की तकनीकी जांच शुरू की गई है। नौ विभागों से रिकॉर्ड मांगा गया है।

पटना, 29 सितंबर, आलम की खबर: बिहार में बड़े सरकारी टेंडरों की प्रक्रिया को लेकर निगरानी विभाग ने तकनीकी जांच शुरू करने की पहल की है। जनवरी 2026 से अब तक 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक अनुमानित राशि वाले सभी टेंडरों को जांच के दायरे में रखा गया है। इस प्रक्रिया के तहत नौ प्रमुख विभागों से टेंडर से संबंधित विस्तृत जानकारी और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।

जांच की जिम्मेदारी निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग को दी गई है। जांच का उद्देश्य टेंडर प्रक्रिया में अपनाए गए तकनीकी और निर्धारित नियमों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करना है। इसमें निविदा जारी होने से लेकर उसके निपटारे तक की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।

नौ विभागों के टेंडर जांच के दायरे में

निगरानी विभाग की ओर से जिन विभागों से रिकॉर्ड मांगा गया है, उनमें नगर विकास विभाग, पथ निर्माण विभाग, पर्यटन विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, ऊर्जा विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, भवन निर्माण विभाग, लघु जल संसाधन विभाग और स्वास्थ्य विभाग शामिल हैं।

इन विभागों से जनवरी 2026 से अब तक जारी किए गए 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि वाले टेंडरों का ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा गया है। संबंधित विभागों को प्रत्येक टेंडर से जुड़े दस्तावेज और प्रक्रिया संबंधी जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।

टेंडर प्रक्रिया में किन बिंदुओं की होगी पड़ताल

तकनीकी जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि निविदा की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और तकनीकी प्रावधानों के अनुरूप पूरी हुई या नहीं। दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़, प्रक्रिया में नियमों से विचलन अथवा अन्य तकनीकी विसंगति की भी जांच की जाएगी।

इसके अलावा टेंडर किस चरण में है और उसका निपटारा किस स्थिति में हुआ, इसकी भी समीक्षा की जाएगी। अनुमानित राशि और टेंडर के अंतिम परिणाम के बीच कितना अंतर रहा, इस पहलू को भी जांच में शामिल किया गया है।

हर टेंडर के लिए मांगी गई अहम जानकारी

निगरानी विभाग ने संबंधित विभागों से प्रत्येक टेंडर के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं। इनमें निविदा आमंत्रण सूचना, निविदा जारी करने की तारीख, प्रस्तावित कार्य का नाम और निविदा में दर्ज प्राक्कलित राशि शामिल है।

इसके साथ ही टेंडर के निपटारे की वर्तमान स्थिति और अनुमानित राशि की तुलना में अंतिम परिणाम कितना कम या अधिक रहा, इसकी जानकारी प्रतिशत के रूप में भी मांगी गई है।

इन आंकड़ों और दस्तावेजों के आधार पर तकनीकी परीक्षक कोषांग टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा करेगा।

तकनीकी विशेषज्ञ भी जांच प्रक्रिया में शामिल

निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग में तकनीकी मामलों की जानकारी रखने वाले अभियंताओं की भी तैनाती है। ऐसे में जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टेंडर प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी।

जांच में यह देखा जाएगा कि विभागों की ओर से निविदा तैयार करने, जारी करने, प्राप्त करने और उसका निपटारा करने की प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई। साथ ही अंतिम स्वीकृति और टेंडर परिणाम से जुड़े रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जा सकता है।

गड़बड़ी मिलने पर आगे हो सकती है कार्रवाई

जांच के दौरान यदि किसी टेंडर में निर्धारित नियमों के उल्लंघन, प्रक्रिया संबंधी अनियमितता या तकनीकी गड़बड़ी से जुड़े तथ्य सामने आते हैं, तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल निगरानी विभाग ने संबंधित विभागों से रिकॉर्ड और टेंडर से जुड़ी जरूरी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके बाद उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तकनीकी परीक्षक कोषांग अलग-अलग टेंडरों की समीक्षा करेगा।

बड़े सरकारी कार्यों और करोड़ों रुपये की योजनाओं से जुड़े टेंडरों की यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके दायरे में राज्य के कई प्रमुख निर्माण, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शहरी विकास और आधारभूत संरचना से जुड़े विभागों के ठेके शामिल हैं।


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